सरदार वल्लभभाई पटेल का देशी रियासतों के विलीनीकरण में योगदान

Authors

  • Monika Kumari Ph.D. Research Scholar, Shri Jagdish prasad Jhabarmal Tibrewala University, Churela, Jhunjhunu Rajasthan
  • Dr. Sonu Saran Associate Professor, Shri Jagdish prasad Jhabarmal Tibrewala University, Churela, Jhunjhunu Rajasthan

Keywords:

प्रजामण्डल, एकीकरण, देशी रजवाड़े, अखण्ड भारत, लौह पुरूष, ब्रिटिश सरकार

Abstract

1927 में अखिल भारतीय राज्य प्रजामण्डल की स्थापना के साथ ही सरदार पटेल की देशी रजवाडों में दिलचस्पी पैदा हो गई थी। प्रजामण्डल का लक्ष्य देशी रजवाड़ों में लोकतंत्र और प्रतिनिधिक संस्थाओं की स्थापना करना था। प्रजामण्डल या पटेल देशी रजवाड़ों का अंत नहीं चाहते थे। उनकी इच्छा सिर्फ यह थी कि देशी रजवाडे़ देश की मुख्य धारा में सम्मिलित हों और अपनी जनता की भलाई के लिए काम करें। वे पूरी तरह ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में थे। देशी रजवाड़ों के संबंध में सरदार पटेल का यह दृष्टिकोण अंत तक बना रहा। उन्होंने 1929 में ही देशी नरेशों को यह विश्वास दिला दिया था कि स्वतंत्र भारत में उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।
सरदार पटेल भारत की समस्त रियासतों का एकीकरण करके अखण्ड भारत की कल्पना करते थे। साम, दाम, दण्ड और भेद की नीति में वे पारंगत थे। यही कारण है कि जो देशी राजा भारत में विलय के इच्छुक नहीं थे, उन्हें भी पटेल ने इस नीति को अपनाते हुए विवश कर दिया, जिससे किसी ने आत्मसमर्पण किया तो किसी ने प्रसन्नतापूर्वक विलय कर लेना चाहा। हैदराबाद, जूनागढ़, त्रावणकोर , भोपाल, जम्मू कश्मीर शामिल होने के लिए तैयार नहीं थे। वे अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने का सपना संजोए हुए थे। सरदार पटेल की युक्ति कारगर रही। हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू कश्मीर को छोड ़कर शेष देषी रियासतें 15 अगस्त 1947 तक सहमत हो गई। इन तीन रियासतांे को भी अलग-अलग कारणों से भारत में शामिल होना पड़ा।

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Published

2026-04-21

How to Cite

Monika Kumari, & Saran, S. (2026). सरदार वल्लभभाई पटेल का देशी रियासतों के विलीनीकरण में योगदान. AGPE THE ROYAL GONDWANA RESEARCH JOURNAL OF HISTORY, SCIENCE, ECONOMIC, POLITICAL AND SOCIAL SCIENCE, 7(4), 24–31. Retrieved from https://agpegondwanajournal.co.in/index.php/agpe/article/view/479