थार के ताल छपर का पारिस्थितिकी एवं सांस्कृतिक महा संगम का भौगोलिक अध्ययन

Authors

  • Dr. Jagna Ram Suda Principal Tagore Gramotthan College, Ratanpura (Churu), Rajasthan, India

Keywords:

ताल छापर, थार मरुस्थल, सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र, काला हिरण, मोथिया घास

Abstract

           थार मरुस्थल के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित 'ताल छपर अभ्यारण्य' (चूरू, राजस्थान) के सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी सांस्कृतिक प्रासंगिकता का एक व्यापक भौगोलिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। ताल छपर का भू-भाग एक अद्वितीय 'लवणीय बेसिन'और 'सवाना' सदृश घास के मैदान का प्रतिनिधित्व करता है, जो संकटग्रस्त प्रजाति 'काले हिरण' और विभिन्न प्रवासी पक्षियों का मुख्य आश्रय स्थल है। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया के बीच एक 'हरित नखलिस्तान' की भूमिका निभाता है। सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, यह क्षेत्र मानव-प्रकृति सह-अस्तित्व, बिश्नोई व स्थानीय ग्रामीण समुदायों की पर्यावरण-चेतना और शेखावाटी लोक संस्कृति का अनुपम उदाहरण है। इस अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों के आधार पर यहां के भौगोलिक कारकों, जैव-विविधता और सांस्कृतिक ताने-बाने के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया गया है।

          यह क्षेत्र काले हिरणों की क्रीड़ा स्थली होने के साथ-साथ घास के मैदानों और प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। साथ ही, यह मरुस्थलीय संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत केंद्र है।

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Published

2026-09-03

How to Cite

Suda , J. R. . (2026). थार के ताल छपर का पारिस्थितिकी एवं सांस्कृतिक महा संगम का भौगोलिक अध्ययन. AGPE THE ROYAL GONDWANA RESEARCH JOURNAL OF HISTORY, SCIENCE, ECONOMIC, POLITICAL AND SOCIAL SCIENCE, 7(9), 1–7. Retrieved from https://agpegondwanajournal.co.in/index.php/agpe/article/view/500